राजस्थान मौसम अपडेट: आज 12 से अधिक जिलों में झमाझम बारिश का येलो अलर्ट, क्या उमस और गर्मी से मिलेगी राहत?

Aug 24, 2026 - 10:49
Aug 24, 2026 - 11:12
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राजस्थान मौसम अपडेट: आज 12 से अधिक जिलों में झमाझम बारिश का येलो अलर्ट, क्या उमस और गर्मी से मिलेगी राहत?

राजस्थान में मानसून की चाल इन दिनों आंख-मिचौली खेल रही है। प्रदेश के कई हिस्सों में जहां लोग सावन और भादो की झमाझम बारिश का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, वहीं आसमान में काले बादल छाने के बावजूद वे बिना बरसे ही लौट रहे हैं। बारिश की इस बेरुखी के कारण राजस्थान के अधिकांश जिलों में चिपचिपी गर्मी और उमस ने आम जनजीवन को खासा बेहाल कर दिया है। हालांकि, मौसम विभाग (IMD) ने प्रदेशवासियों के लिए एक राहत भरी खबर देते हुए ताजा मौसम बुलेटिन जारी किया है। मौसम विज्ञान केंद्र, जयपुर के अनुसार, आज राजस्थान के 12 से अधिक जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश का 'येलो अलर्ट' जारी किया गया है।

​'ख़बर रफ़्तार 24' की इस विस्तृत और विशेष रिपोर्ट में आइए विस्तार से जानते हैं कि आज किन-किन जिलों में बारिश की संभावना है, मौसम का मिजाज कैसा रहेगा, मानसून की सक्रियता में कमी के क्या वैज्ञानिक कारण हैं, और बारिश की इस कमी से किसानों और बांधों पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।

​इन जिलों में मौसम विभाग का 'येलो अलर्ट' जारी

​मौसम केंद्र जयपुर द्वारा जारी किए गए ताजा अपडेट के अनुसार, पूर्वी राजस्थान के जयपुर, भरतपुर, कोटा, अजमेर और उदयपुर संभागों के अंतर्गत आने वाले 12 से 14 जिलों में आज हल्की से मध्यम बारिश होने की प्रबल संभावना है। मौसम विभाग ने जिन प्रमुख जिलों के लिए 'येलो अलर्ट' जारी किया है, उनमें राजधानी जयपुर, सीकर, झुंझुनूं, दौसा, अलवर, अजमेर, टोंक, भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, बूंदी, कोटा, बारां और झालावाड़ शामिल हैं।

​इन जिलों में मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आसमान में बादल छाए रहेंगे और कुछ स्थानों पर तेज हवाओं (30-40 किलोमीटर प्रति घंटा) के साथ अचानक बारिश हो सकती है। इसके साथ ही मेघगर्जना और आकाशीय बिजली गिरने की भी आशंका जताई गई है, जिसके चलते लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। हालांकि, पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर और बीकानेर संभाग के अधिकांश इलाकों में मौसम मुख्यतः शुष्क ही रहने का अनुमान है।

​राजस्थान में क्यों सुस्त पड़ा है मानसून? (वैज्ञानिक कारण)

​कई लोगों के मन में यह सवाल है कि जब पूरे देश में अच्छी बारिश हो रही है, तो राजस्थान में सावन के महीने में भी मानसून इतना कमजोर क्यों है? मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे 'मानसून ट्रफ लाइन' (Monsoon Trough Line) का खिसकना मुख्य कारण है।

​दरअसल, मानसून के दौरान जिस क्षेत्र से यह ट्रफ लाइन गुजरती है, उसके आसपास ही बारिश की गतिविधियां सबसे अधिक होती हैं। वर्तमान स्थिति में यह ट्रफ लाइन राजस्थान के ऊपर से न गुजरकर उत्तर भारत के अमृतसर, पटियाला, मुजफ्फरनगर, बरेली, कानपुर, वाराणसी, डालटनगंज और दीघा होते हुए सीधा उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी की तरफ जा रही है। ट्रफ लाइन का एक बड़ा हिस्सा राजस्थान की सीमा से दूर होने के कारण प्रदेश में मानसून की गतिविधियां कमजोर पड़ गई हैं और हवाओं में नमी की मात्रा घट गई है। यही कारण है कि बादल तो बनते हैं, लेकिन वे बरसने की स्थिति में नहीं आ पाते।

​बारिश की भारी कमी: जिलों में सूखे जैसे हालात

​मानसून की इस सुस्ती का सीधा असर बारिश के आंकड़ों पर दिख रहा है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस पूरे मानसून सीजन में राजस्थान में अब तक सामान्य से लगभग 10 से 19 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। कुछ जिलों की स्थिति तो और भी चिंताजनक है:

​जोधपुर में 36% कम बारिश: पश्चिमी राजस्थान के प्रमुख शहर जोधपुर में इस बार मानसून पूरी तरह से रूठा हुआ है। 22 अगस्त तक जोधपुर में सामान्यतः 225.6 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन इस बार केवल 189.2 मिमी बारिश ही रिकॉर्ड की गई है, जो कि सामान्य से 36 फीसदी कम है।

​कोटा में 33% कम बारिश: हाड़ौती अंचल, जिसे अच्छी बारिश के लिए जाना जाता है, वहां भी बारिश का टोटा है। कोटा जिले में अब तक औसत से 33 प्रतिशत कम पानी बरसा है। इस सीजन में अभी तक मात्र 379.8 मिमी बारिश हुई है, जबकि सामान्य आंकड़ा 564.8 मिमी का होना चाहिए था।

​अलवर में 13% कम बारिश: अलवर में अब तक 352.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई है, जबकि सामान्य बारिश 406.2 मिलीमीटर होनी चाहिए थी।

​किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें

​बारिश की इस भारी कमी ने प्रदेश के लाखों किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खरीफ की फसल, जिसमें मुख्य रूप से बाजरा, ग्वार, मूंग, मोठ और चारे की बुवाई की गई है, उसे इस समय सिंचाई के लिए पानी की सख्त आवश्यकता है। यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी और झमाझम बारिश नहीं होती है, तो फसलें सूखने की कगार पर आ सकती हैं। इसके अलावा, राज्य के कई ऐतिहासिक बांधों और झीलों में पानी की आवक बहुत कम हुई है। यदि बांध नहीं भरते हैं, तो आने वाले सर्दियों और गर्मियों के मौसम में पेयजल का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। भूजल स्तर के लगातार नीचे जाने से ट्यूबवेल पर निर्भरता भी बढ़ रही है, जो एक स्थायी समाधान नहीं है।

​तापमान में वृद्धि और उमस का प्रकोप

​बारिश न होने के कारण तापमान में लगातार उछाल देखा जा रहा है। श्रीगंगानगर जैसे सीमावर्ती इलाकों में अधिकतम तापमान 38 से 39.9 डिग्री सेल्सियस के करीब बना हुआ है। चूरू, बीकानेर, फलोदी और फतेहपुर में भी पारा 36 से 37 डिग्री के बीच झूल रहा है। हवाओं के रुकने और तेज धूप के कारण दिन के समय उमस (Humidity) का स्तर बहुत अधिक बढ़ गया है, जिससे लोग चिपचिपे पसीने से बेहाल हैं।

​आम जनता के लिए विशेष चेतावनी (Advisory)

​आपदा प्रबंधन विभाग और मौसम केंद्र ने आम जनता से अपील की है कि मौसम के येलो अलर्ट को गंभीरता से लें। तेज आंधी और बारिश के दौरान निम्नलिखित सावधानियां बरतें:

​आकाशीय बिजली से बचने के लिए बारिश के दौरान खुले मैदानों, पेड़ों के नीचे या बिजली के खंभों के पास खड़े न हों।

​कच्चे मकानों और टीन-शेड से दूर रहें।

​किसानों को सलाह दी गई है कि वे मौसम साफ होने पर ही खेतों में उर्वरक या कीटनाशक का छिड़काव करें।

​वाहन चलाते समय दृश्यता (Visibility) कम होने पर गाड़ी की गति धीमी रखें और सुरक्षित स्थान पर रुकें।

​उम्मीद है कि बंगाल की खाड़ी में बन रहे नए सिस्टम के प्रभाव से आने वाले दिनों में ट्रफ लाइन राजस्थान की ओर खिसकेगी और प्रदेश को इस भीषण गर्मी से राहत मिलेगी। मौसम से जुड़ी पल-पल की सटीक जानकारी के लिए 'ख़बर रफ़्तार 24' पर बने रहें।

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